ऑनलाइन न्यूज नेटवर्क (ONN)
देश की सीमाओं पर तैनात भारतीय सेना के जवान सिर्फ वर्दी नहीं पहनते, वे हर दिन अपने प्राणों को हथेली पर रखकर राष्ट्र की रक्षा करते हैं। हिमाचल प्रदेश, जिसे वीरों की भूमि कहा जाता है, लगातार ऐसे ही जांबाज़ सपूत देश को देता रहा है। इसी कड़ी में रामपुर बुशहर क्षेत्र के निवासी मेजर ओजस्वी शर्मा को उनकी अदम्य वीरता, साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए सेना मेडल (वीरता) से सम्मानित किया जाना पूरे प्रदेश के लिए गर्व का क्षण बन गया है।
रामपुर में जश्न का माहौल
बता दें कि इस उपलब्धि के बाद से पूरे क्षेत्र में जश्न का माहौल है। उनके माता नीना शर्मा और पिता अरविंद शर्मा का कहना है कि उन्हें अपने जाबांज बेटे पर गर्व है। माता नीना शर्मा ने बताया कि बचपन से ही ओजस्वी मातृभूमि की रक्षा करने का सपना देखता था। उसका एक ही लक्ष्य था- सेना में भर्ती होना।
बता दें कि ओजस्वी को यह सम्मान मातृभूमि की रक्षा करते हुए असाधारण साहस, निष्ठा और समर्पण के लिए प्रदान किया गया है। उनके सम्मान की खबर सामने आते ही परिवार, क्षेत्र और पूरे हिमाचल में गर्व और भावुकता का माहौल है।
कमांडो प्रशिक्षण में गोल्ड मेडल
जानकारी के अनुसार मेजर ओजस्वी शर्मा ने कमांडो प्रशिक्षण के दौरान गोल्ड मेडल हासिल किया था। वे अब तक कई महत्वपूर्ण अभियानों का हिस्सा रह चुके हैं। उन्होंने लेह-लद्दाख क्षेत्र में भी सेवाएं दी हैं, जहां भारतीय सेना अत्यंत कठिन परिस्थितियों में तैनात रहती है।
सेना से जुड़े सूत्रों के अनुसार उत्तर-पूर्व में अरुणाचल प्रदेश के भारत-चीन सीमा क्षेत्र में एक साहसिक अभियान के दौरान मेजर ओजस्वी शर्मा सात भारतीय सैनिकों के साथ एक अग्रिम चौकी पर पहुंचे। इस अभियान में हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट की स्थिति बनी, जहां भारतीय जवानों ने साहस का परिचय देते हुए स्थिति पर नियंत्रण स्थापित किया और तिरंगा फहराया। इस कार्रवाई के बाद उस महत्वपूर्ण स्थान को सम्मान स्वरूप “ओजस्वी प्वाइंट” नाम दिया गया।
मेजर ओजस्वी शर्मा की उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि हिमाचल के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि समर्पण, अनुशासन और देशप्रेम के साथ कोई भी युवा भारतीय सेना में सर्वोच्च मुकाम हासिल कर सकता है।
क्या है सेना मेडल
सेना मेडल (Gallantry) भारतीय सेना के उन चुनिंदा सम्मानों में शामिल है, जो असाधारण वीरता के लिए दिया जाता है। यह पदक केवल धातु का टुकड़ा नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों का प्रतीक है, जहां सैनिक अपने जीवन की परवाह किए बिना राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हैं। मेजर ओजस्वी शर्मा को मिला यह सम्मान भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा को और मजबूत करता है।
