ऑनलाइन न्यूज़ नेटवर्क (ONN)
रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन IGMC शिमला, HMOA हिमाचल प्रदेश और SAMDCOT शिमला ने मुख्यमंत्री से ओक ओवर में मुलाकात की और घटना से संबंधित तथ्यों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने सभी सबूतों (जो आज पेश और जमा किए गए) को ध्यान में रखते हुए, उक्त मामले की जांच शुरू करने का आश्वासन दिया। इसके अलावा, IGMC शिमला में उक्त मामले से संबंधित सुरक्षा खामियों की भी गहराई से समीक्षा की गई, जिसके कारण IGMC शिमला में भीड़ द्वारा ट्रायल और मीडिया ट्रायल हुए।
RDA IGMC शिमला अपनी मांगों पर कायम है, जो इस प्रकार हैं:-
1) डॉ. राघव के खिलाफ जारी टर्मिनेशन ऑर्डर को तुरंत रद्द किया जाए।
2) IGMC शिमला परिसर के अंदर भीड़ द्वारा डराने-धमकाने/ट्रायल की एक घटना हुई, जिसने स्वास्थ्य पेशेवरों की सुरक्षा और काम के माहौल को गंभीर रूप से खतरे में डाल दिया और अस्पताल के सामान्य कामकाज को बाधित किया। यह मांग की जाती है कि BNS की धारा 351, 351(3), 352, 61, 62, 190, 191 के तहत तुरंत FIR दर्ज की जाए और कानूनी कार्यवाही शुरू की जाए।
3) कथित तौर पर भीड़ द्वारा सरकारी संपत्ति में तोड़फोड़ की गई। यह मांग की जाती है कि लागू कानूनों के अनुसार अपराधियों के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए।
4) कथित तौर पर नरेश दस्ता द्वारा डॉ. राघव की जान को सीधा खतरा और उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर करने की धमकी दी गई। यह मांग की जाती है कि BNS की धारा 351, 351(3), 352, 61, 62, 190, 191 के तहत तुरंत FIR दर्ज की जाए और उचित कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए।
5) IGMC शिमला में पहले उजागर की गई CCTV कवरेज की कमियों और सुरक्षा खामियों को लागू न करने के संबंध में एक व्यापक समीक्षा और जवाबदेही तय करने की मांग की जाती है, जबकि पहले गैप एनालिसिस किया गया था, जिसने कथित तौर पर इस गंभीर घटना में योगदान दिया।
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला के सभी रेजिडेंट डॉक्टरों ने 27/12/2025 सुबह 9:30 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला किया है, जिसमें सभी नियमित सेवाएं, वैकल्पिक ऑपरेशन थिएटर और आउट पेशेंट विभाग बंद रहेंगे। हालांकि, आपातकालीन सेवाएं चालू रहेंगी।
इसी कड़ी में आज पांवटा साहिब अस्पताल में भी आपातकाल सेवाओं के अलावा सभी सेवाएं बंद रही। अस्पताल में भी मरीज उपचार के लिए भटकते नज़र आये। एडमिट मरीज भी स्वास्थ्य जांच व टेस्ट करवाने के लिए लाचार दिखे। हालांकि, सेवाएं ठप होने से लोग अस्पताल आकर भी बिना ईलाज के वापिस लौट गए। जबकि कई मरीज अस्पताल तक पहुंचे ही नहीं। मरीजों के साथ आये तीमारदारों ने कहा कि उन्हें कई तरह की मुश्किलें खड़ी हो गई हैं, एक और उनका मरीज एडमिट है तो टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। जिस कारण उनका मरीज बिना पूरा ईलाज के बेड पर लेटा हैं। पांवटा साहिब अस्पताल इंचार्ज डॉ सुधीर गुप्ता का कहना हैं कि हिमाचल डॉक्टर्स एससोसियेशन के आह्वान पर अस्पताल में सिर्फ आपातकाल सेवाएं दी जा रही हैं।
